मेरा माही बड़ा सोणा है
आजा आजा वे माही आजा
सोणे पे दिल खोणा है
आजा आजा वे चन्ना आजा
मेरे यार सा दिलदार सा ना कोई होणा है
मेरा माही बड़ा ...
आजा आजा वे माही आजा
आजा वे चन्ना
आजा वे सजणा
हाथों की चूड़ी खनका दे
मेहंदी का रंग खिला दे
बिंदिया मेरी चमका दे
बरसों की प्यास बुझा दे
मेरा अंग अंग महका दे
हाथों की चूड़ी खनका दे
मनमीत के मुझे जीत के सपनों को सजाना है
मेरा माही बड़ा ...
आजा आजा वे माही ...
जोगी कैसा रोग लगा पीड़ सही ना जाए रे
जोगन बन मैं भई बांवरी रोग बड़ा तड़पाए रे
आस लगाए नैना बिछाए तरस रहे हैं राहों में
आजा आजा वे माही ...
दूरी सही ना अब जाए
पल पल जुदाई तड़पाए
तन्हाई दर्द बढ़ाए
तनमन में आग लगाए
कोई जा के उन्हें समझाए
दूरी सही ना अब जाए
अब तो मुझे महबूब के होंठों को भिगोना है
मेरा माही बड़ा ...
आजा आजा वे माही ...
हां मेरा दिल कह रहा है मैं सर से लेकर पांव तक
तेरे संदली बदन पे मुहब्बत लिख दूं
मेरा दिल कह रहा है मैं तेरे सुर्ख लरज़ते होंठों
की लाली पे अपने लबों की शबनमी शरारत लिख दूं
हां मेरा दिल कह रहा है तेरी पाजेब की झनकार पे
तेरे बाहों के चन्द्रहार पे अपनी बेचैनियों की हालत
लिख दूं मेरा दिल कह रहा है तेरे उलझे गेसू
संवारूं इन आँखों के आईने में तेरा दुल्हन सा
रूप निहारूं इस महकती ज़मीं की सेज पे अपने
अरमानों की चाहत लिख दूं मुहब्बत लिख दूं
मुहब्बत
आजा आजा वे माही ...